भरत पटेल
इंदौर। 08 मई 2025 को माननीय न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सीताराम रघुवंशी की याचिका (क्रमांक 24114/2023) को स्वीकार करते हुए शासन द्वारा दिनांक 28/07/2023 को पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत याचिकाकर्ता की कांस्टेबल (GD) पद (पुलिस विभाग) के लिए अभ्यर्थिता को अस्वीकार कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अविरल विकास खरे एवं अधिवक्ता ऋषभ शुक्ला द्वारा पक्ष रखा गया।
याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को एक आपराधिक प्रकरण (धारा 457, 380 IPC) के आधार पर दस्तावेज सत्यापन के समय खारिज कर दिया गया था, जबकि याचिकाकर्ता उक्त प्रकरण में वर्ष 2019 में ससम्मान बरी हो चुके थे। न्यायालय ने पाया कि शासन द्वारा सिर्फ प्रकरण के पंजीकरण के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज करना कानूनसम्मत नहीं है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की बरी होने की स्थिति "ससम्मान" थी क्योंकि निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया था कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण नहीं था। अतः केवल आपराधिक प्रकरण के पंजीकरण को आधार बनाकर नियुक्ति से वंचित करना न्यायोचित नहीं है।
अतः न्यायालय ने न केवल शासन का आदेश निरस्त किया, बल्कि यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के मामले को स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया जाए और उसे कांस्टेबल (GD) (पुलिस विभाग) पद पर उसकी पात्रता की तिथि से नियुक्ति दी जाए, साथ ही सभी आनुषांगिक लाभ प्रदान किए जाएं (किन्तु बकाया वेतन को छोड़कर)।
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